Wednesday, December 31, 2014

Jan 2015 - Rashifal

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मेष राशि - अचानक धन लाभ ,  किन्तु कुछ मानसिक तनाव और घरेलू उलझनें होंगी , माह के अंत में कुछ मानसिक तनाव एवं घरेलू उलझने , व्यर्थ की दौड़ धूप और खर्च अधिक होंगे . क्रोध की अधिकता हो सकती है.

वृष राशि - धन लाभ, उन्नति के अवसर मिलेंगे. कुछ बिगड़े काम बनेंगे. खर्च की अधिकता भी रहेगी. माह के अंत में व्यवसाय में दौड़ धूप अधिक रहेगी. वाहन चलाते समय सावधानी रखें.

मिथुन राशि - व्यवसाय में भागदौड़ और खर्च अधिक होंगे. स्वास्थ्य संबंधी परेशानियाँ हो सकती है. निकट संबधियों से मन मुटाव हो सकता है.

कर्क राशि - धर्म कर्म की ओर रूचि बढ़ेगी. बहुत अधिक परिश्रम के बाद काम चलने योग्य साधन जुटेंगे. खर्च अधिक हो सकते है. माह के अंत में कामों में विघ्न आ सकते है.

सिंह राशि - कुछ नयी योजनायें बन सकती है किन्तु धन की समस्या हो सकती है. क्रोध के कारण धन की हानि हो सकती है. मानसिक तनाव घरेलू समस्याओं के कारण हो सकता है.  मकर संक्रांति के दिन गर्म वस्त्रों का दान करें .

कन्या राशि - मेहनत के बाद गुजारे योग्य आमदनी के साधन बनेंगे. अत्याधिक खर्च और पारिवारिक समस्याएं मानसिक तनाव पैदा कर सकती है. बनते कामों में रुकावटें आ सकती है.

तुला राशि - व्यवसाय से सम्बंधित कुछ नयी योजनायें बन सकती है. अत्याधिक दौड़ धूप के बाद भी धन का लाभ विशेष नहीं होगा .इसके निवारण के लिए मंदिर में धार्मिक पुस्तक का दान संक्रांति को करें,

वृश्चिक राशि - पराक्रम में वृद्धि और व्यवसाय में लाभ होगा. किन्तु कुछ खर्चे और घरेलु तनाव परेशान कर सकता है. इसलिए लक्ष्मी चालीसा का पाठ करें .

धनु राशि - परिस्थितियां श्रम वाली होंगी. आय कम और खर्च अधिक रहेगा. संक्रांति को सूर्य उपासना करें.

मकर राशि - परिश्रम के द्वारा लाभ और उन्नति के अवसर बनेंगे. वृथा खर्च और पारिवारिक उलझनें की सम्भावना भी है. शान्ति के लिए सूर्य उपासना करें.

कुम्भ राशि - अचानक आये खर्चे और पारिवारिक समस्याएं मानसिक तनाव पैदा कर सकते है. कार्य / व्यवसाय की स्थिति साधारण रहेगी जिससे केवल निर्वाह योग्य आय की प्राप्ति होगी.

मीन राशि - योजनाओं में सफलता मिलेगी. धन लाभ और उन्नति के अवसर मिलेंगे . धर्म कर्म की ओर प्रवृत्ति रहेगी. किन्तु कुछ विघ्न, खर्च और गुप्त चिंताएं परेशान कर सकती है. 

Thursday, August 7, 2014

August 2014 Prediction

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August 2014

मेष  - राशी स्वामी  मंगल की दृष्टि होने से मान  -प्रीतिष्ठ  बढेगा और  बडे लोगो से सम्पर्क  बढेगे परन्तु शनि की दृष्टी भी होने से  अकस्मिक खर्च तथा तनाव  बढेगे. मासांत  मे खर्चो मे वृद्धि  के साथ निर्वाह योग्य आय के साधन बनेगे.

 वृष - माह के आरम्भ  मे इस राशी पर मंगल की दृष्टी होने से अकस्मिक खर्चो मे वृद्धि  होगी. पूर्वार्ध  भाग मे अत्यंत कठिन समस्याओ का सामना रहेगा. व्यर्थ की भागदौड़  ऑर चिन्ताओ मे भी वृद्धि  होगी. उतरार्ध भाग मे कोई बिगडा कार्य बन जाने से हालत मे सुधार होंगे. खुशी के अवसर भी मिलेंगे.


मिथुन- महिने के प्रारम्भ  मे अत्यधिक परिश्रम के करने से ही निर्वाह योग्य धन की प्राप्ति होगी. किन्तु बुध दूसरे भाग मे अस्तगत होने से लेन देन के कार्यो में  परेशानी ऑर खर्च भी बढ़ चढ़  के होंगे. उतरार्ध मे कुछ  बिगडे काम बनेगे. धर्मिक कार्यो मे रूचि रहेगी. किन्तु स्वास्थ्य ढीला ऑर गुप्त चिन्ताये रहेगी. श्री विष्णु सहस्त्रनाम  का पाठ करना  शुभ होगा.

कर्क - इस माह शनि की अशुभ दृष्टी होने से बंटे कामो मे विघन,घरेलू ऑर अर्थिक उलझने बढेगी. परिवार मे मन मुटाव रहे. स्वास्थ्य  सम्बन्धी चिन्ता परन्तु  गुरु का संचार  होने से अकस्मत धन लाभ की सम्भावनाये होंगी. परिवार मे शुभ सूचना ऑर विदेशी सम्पर्क सूत्र बनेगे.

सिंह- अक्समात  धन लाभ वे उन्नती के योग है . शुभ कार्यो पे खर्च होंगे. परिवारिक सहयोग से किसी विशेष कार्य मे सफलता मिले. किन्तु उत्तरार्ध  भाग मे कुछ व्यवसायिक  व अर्थिक उलझनो का सामना रहेगा. किसी नवीन कार्य योजना को कार्यरूप देने का प्रयास लाभकर होगा.

कन्या- शनि की साढ़े साती  के कारण बनते कामो मे विघ्न -बाधाये उत्पन्न  होंगी. व्यवसाय मे संघर्ष  ऑर कठिन हालत  के बावजुद  निर्वाह योग्य आमदनी  के साधन बनते  रहेंगे. उत्तरार्ध  भाग मे भूमि जायदाद सम्बन्धी सुख साधनो पर खर्च अधिक होंगे .स्वास्थ्य ढीला रहेगा।  शिव उपासना कल्याणकारी होगी। 

तुला - मास आरम्भ  मे शनि की उच्च स्थिति होने से सुख -साधनो पर खर्च अधिक होगा  परन्तु अत्यधिक परिश्रम करने पर ही आय के साधन बढेगे।  शनि उच्च होने  पर होने से घरेलू हलत मे सुखद परिवर्टन होगे किन्तु  परिवारिक चिन्ता बनी रहेगी . ता 23 के बाद विदेशी कामो मे प्रगति  होगी.

वृश्चिक-गुरु की शुभ  दृष्टी होने से व्यवसाय मे लाभ के  अवसर और  स्वास्थ्य मे सुधार होगा. निर्वाह योग्य आय के साधन बनेगे. शुभ समाचार मिलेगा. उत्तरार्ध  भाग मे शुभ कार्यो पर खर्च होगा. अकस्मात्  मन मे उचाटता , उदासीनता और  परिवार मे मत भेद  भी उत्तपन होंगे. बनते कामो मे विघन उत्तपन्न  होंगे. चन्दिका स्तोत्र या मंत्र का पाठ करना शुभ होगा.

धनु- मासारम्भ मे राशिस्वामी गुरु उच्च  होकर अस्तगत है,फलस्वरुप शुरू मे बंटे कार्यो मे अड़चने रहेंगी. धन लाभ भी कम रहेगा. खर्च अधिक होगा. तरिक.5 के बाद गुरु पूर्वा दिशा से उदित होगा. बिगडे कामो मे सुधार होगा. आय के साधनो मे वृद्धि होगी. मासांत  मे कोई शुभ समाचार मिलेगा.

मकर- मसरम्भ मे मंगल की उच्च दृष्टी पड़ने से  गृह मे मंगल कार्य पर खर्च होगा. समाज मे मान प्रतिष्ठा बदेगी. किसी नये कार्य की योजना बनेगी. निकट व्यक्ति द्वारा सम्मान प्राप्त  होगा. रुका हुआ धन मिलने के अवसर बनेगे. आर्थिक परेशानियों  के कारन  उलझने बढेगी.

कुम्भ- राशी स्वामी शनि व मंगल का योग होने से विशेष रूप से स्वास्थ्य परेशानी,मानसिक तनाव , बनते  कामो मे विघन ऑर धन का खर्च अधिक रहेगा.उत्तरार्ध  मे किसी नवीन  कार्य की योजना बनेगी. अचानक  धन लाभ के भी अवसर मिलेगे. खर्च भी अधिक रहे.

 मीन- माह के आरम्भ  मे इस राशी पर केतु संचार होने से आकस्मिक  खर्च मे वृद्धि और गुजारे  योग्य आये के साधन बनते  रहेंगे. उत्तरार्ध  भाग मे कार्य व्यवसाय के लिए उत्साह में वृद्धि होगी किन्तु व्यर्थ के खर्चे परेशान करेंगे. स्वास्थ्य में उतार चढाव रहेगा।   धार्मिक कार्यो की तरफ रुझान बढेगा.

Friday, August 1, 2014

Types of kaal sarp yog and remedy

Anant Kaal Sarpa Yoga - When Rahu in the first house in horoscopes Ketu in the seventh sense Kalsarpa fault is generated . In this yoga native is cheated by own family members, do not take the decision from the brain and use their heart to make decisions. Life is troubled until the middle age. They get opportunities only for survival . They are always under the influence of woman means they make decisions  always  according to them. After middle age they find some relief. They can suffer from the diseases of the mouth and throat. Their life is uplifted because of the cooperation and the fall is due to non-cooperation of females. They work according to their mood and like independence.

Kulik Kalsarpa Yoga - Rahu in the second house, Ketu in eighth house make KULIK Kaal Sarpa Dosha. These Jatakas suffer from secret diseases, wealth and family issues . They always need to do remedy for these problems in some or other form. They get quickly affected by the evil eye, which is why their development is affected. There is the problem also with these persons that they do not understand who is who is their friend and who is foe. Still they try to live happilly and let live others. They have  nature of accumulation of funds . The house and the family remains upset because sourness of speech.

"Vasuki kaalsarp dosh is made when Rahu is located in third house and ketu is in eigth house of the horoscope. Such Jatakas are hard worker , like discipline and have helpful nature. They do not say much about their problems. These are people who always support truth. They do not get support of family which keeps their mind distressed. Though they get support from outside. These persons have the potential to do great things. They get fame and respect but faces worries from brother's side. Vasuki Kalsarpa Native do not get help from fate which leads to irritability in nature. Often with them bizarre events happen."

Shankhpal Kalsarp Yoga - Rahu in fourth house and ketu located in Tenth house affects life to a great extent.Disaggrements from parents, staying away from home, liking for vheicles, not sticking to any profession will and live in search of independent business becomes their nature. Sometimes they loose confidance from self. They are unable to share their pain with anyone . Their friends are selfish of nature mostly. There is high chance of getting infected with toxic bacterias. In some cases chances of suffering from cancer is more than any other yoga. Their enemies keep eye on their property. In spite of making good property comfort from son or daughter ususally they do not get. Their financial condion do not remain stable. In family and society they find difficulties in maintaining principles.

"Padam kalsarp yog is formed when Rahu occupies fifth house and ketu is located in eleventh house. These natives are intelligent and loving of nature. They are never satisfied with their earnings. Their expectations and desires remains high always. Their relationship with prestigious and senior people sees ups and downs. If these native have their first child as son , than some trouble from elder son is always there.Under the control of desire they keep on doing unnecessary expenditures and face situation of defamation and other troubles."

Mahapadam kalsarp yog - This dosha is made when Rahu is situated in enemy house and ketu is placed in house of expenditure. These native face more of problems related to mind / psychology. People repeatedly try to humiliate and strive to put down but these natives do not get afraid and face the situation as per their capacity.

Takshk kalsarp yog - This yoga is made when Rahu occupies seventh house and Ketu First house. These yoga affected native always struggle for family , money and self respect. Sometimes bored with life they even try to leave the household responsibilities. They get cheated by every one , even own spouse breaks the trust.They are unable to enjoy their success because of not having the grace of God and in their heart fire of dissatisfaction keeps them burning.

Paatak kalsarp Yog - When rahu is in tenth house and Ketu is in fourth house binds all the planets, this makes Patak Kalsap Dosh . These natives always lack happiness from marital life and family life. They also do not get benefit from ancestral property. Either from job or Son only one comfort they get in Life. These native always struggle with time. They have high chance of suffering from lung heart or breathing related problems. They always live under the obligation of people and debt.

Vishakt Kalsarp Yog - Eleventh house placed Rahu and Ketu in fifth house , when bind all the planets than Vishakt named dosha is formed. Native gets only one comfort among the education , Son or Children. Because of uncontrolled emotions and generous nature they face lot of problems in life. They do not live for self only but they live for others too. They suffer from the diseases whose effect are long lasting like ulcer,  diabetes etc. Problems from family side especially from elder brother's side keep them troubled. Though they are ready to help any one but get especially worried for elder brother and try to find out way to help them.

Tuesday, July 29, 2014

Exalted and Debilitated state of Planets



Talika - 1.  Grohon ki Uchch Sthiti




Uchch / Exalted   

Neech / Debilitated


Grah/Planet 

Rashi/Sign

Ansh/Degree

Rashi

Ansh












SURYA

MESH

10O

TULA

10O










CHANDRA

VRASHABH

3O

VRISHCHIK

3O











MANGAL

MAKAR

28 O

KARK       

28 O











BUDH

KANYA

15 O

MEEN       

15 O











GURU       

KARK       

5 O

MAKAR

5 O











SHUKRA

MEEN

27 O

KANYA

27 O











SHANI

TULA

20 O

MESH

20 O
















तालिका - 1.  ग्रहों की उच्च और निम्न  स्थिति




उच्च 

नीच 


ग्रह 


राशि


अंश


राशि


अंश













सूर्य

मेष

10O

तुला

10O










चन्‍द्रा

वृषभ 

3O

वृश्चिक

3O











मंगल

मकर

28 

कर्क       

28 











बुध

कन्या

15 

मीन       

15 











गुरु       

कर्क       

5 

मकर

5 O











शुक्र 

मीन

27 O

कन्या

27 O











शनी

तुला

20 O

मेष

20 O

















                                                                                   





                                                                                   



                                                                                   





                                                                                   

Thursday, July 24, 2014

kalasarpa dosha remedies




अनन्त  काल सर्प योग  -  जब प्रथम भाव मे राहू ओर सप्तम भाव मे केतु जनम कुंडली मे हो तो अनन्त नाम का कालसर्प दोष उत्पन्न होता है . इस योग मे जातक  को स्वजनो से धोखा , मस्तिष्क से निर्णय नहीं लेते है और दिल से प्रभावित होकर निर्णय लेते है , जीवन के के मध्य काल तक परेशानी रहती है . केवल  जीवन निर्वाह हेतु अवसर ही मिलते है. स्त्री पक्ष से हमेशा प्रभावित रहते है अर्थात उनके अनुसार चलने वाले होते है . मध्य आयु पश्चात रहट होने की संभावना रहती है . इनको मुख और गले तक के रोगो का भय रहता है . इनका जीवन स्त्री के सहयोग के कारण ही उत्थान करता है अथवा नारी के असहयोग के कारण गिरता  है. ये जातक मनमौजी होते है ओर स्वतंत्रता प्रिय होते है 

कुलिक  कालसर्प योग - जब द्वितीय भाव मे राहू ओर अष्टम मे केतु हो तो  कुलिक काल सर्प दोष बंटा है. ये जातक धन परिवार और गुप्त रोगो से ग्रस्त रहते है .   इनके लिये उपचार ओर उपाय किसी ना किसी रूप में करते रहना अति आवश्यक होता  है. ये दुष्ट  जनो की  कुदृष्टि से प्रभावित शीघ्र हो जाते है , जिसके कारण इनका विकास प्रभावित होता है. इन जातको के साथ  ये समस्या भी होती है कि ये समझ नहीं पाते है की कौन किसका मित्र और कौन किसका शत्रु है फिर भी ये हसते हसते स्वयं भी जीते है और दूसरो को भी जीने देते है. इनका प्रकरम ही इन्हे उनाती के मार्ग दिखता है और बुद्धिमानी ही प्रगती पर le  जाती है. इनमे धन संचय करने की प्रव्रत्ति अधिक  होती है. वाणी की कटुता के कारण घर- परिवार परेशान रहता है.

वासुकी नाम का  काल सर्प दोष तब बनता है जब  तृतीय  भाव मे राहू  और भाग्य भाव मे केतु स्थित हो .  ऐसे जातक अत्यंत परिश्रीमी, उद्योगिक , अनुशाषन प्रेमी और सहयोगिक होते है. ये अपने कष्ट ज्यादा कह नहीं  पाते है . ये सत्य आचरण को पसंद करने वाले व्यक्ति होते  है.  इनको परिवारिक जनो  का सहयोग na होने से चिंताएं मन को व्यथित करती रहती  है.  बाहर का सहयोग मिलता है . इन जाटको me  बड़े बड़े काम कर डालते कि क्षमता होती है. इनको  धन or समान कि प्राप्ति होती है प्रन्तु भाई के परिवार ka सहयोग नहीं मिल पता है . वासुकी कालसर्प दोष से ग्रसित जातक  को भाग्य कि सहायता नहीं मिलती है  जिससे स्वभाव मे चिड़चिड़ापन आ जाता है.  इनके साथ विचित्र घटनाये अक्सर होती रहती है.

शंखपाल कालसर्प योग - राहू चतुर्थ भाव मे और केतु दशम भाव मे स्थित हो कर जीवन को बहुत  प्रभावित करते है.  माता-पिता से  नेया बनना, घर से भगा-भगा फिरना, वाहन प्रिय होना ,  किसी पेशे व्यवसाय पर ना टिक कर स्वतंत्र व्यवसाय की खोज मे रहना इनका स्वभाव बन जाता है. कभी-कभी इन्हे अपने पर भी विश्वास नहीं रहता है.  ऐसे जातक अपनी व्यथा किसी से केह नहीं पाते है . इनके मित्र  स्वार्थी होते है.इनके शरीर मे विषैले कीटाणु युक्त घाव होने कि संभावना होती  है. कॅन्सर कि संभावना तक बन जाती है.  स्वतंत्र और स्वावलंबित  जीवन का लक्ष्य होता है. इनके दुश्मन इनकी संपत्ती पर कुदृष्टि रखते है. अपनी सम्पाती बनाने पर भी पुत्र-पुत्रियों से कष्ट पाते है. आमदनी स्थिर नहीं होती है . परिवार एवं समाज मे मर्यादाये बनाये रखने मे कठिनाइया आती है.  



पदम   नामक कालसर्प योग तब बंटा है जब राहू पंचम भाव me हो और  केतु एकादश अर्थात लाभ भाव में  स्थित हो कर जब सभी ग्रहो को बाधित कर देता है . इस प्रकार के  जातक बुद्धिमान और स्नेहशील होते है. अपने अर्थ प्राप्ति के साधनो से असंतुष्ट रहते है .  इनकी आकांक्षाए और अपेक्षाए अधिक रहती है . अपने से प्रतिष्ठित एवं बड़े लोगो से कभी संबद्ध ​बनते​ है,  कभी बिगड़ते  है. पुत्र रूप मे प्रथम सन्तान कष्टकारी सिद्ध होती है. इच्छाओं के वशीभूत होकर जीवन भर अनावश्यक व्यय ; अपयश और परेशानियो का सामना करते रहते है. 

महापदम नामक कालसर्प योग - यह तब बनता है जब ​ रोग ओर शत्रु भाव से राहू ​और ​ व्यय भाव में  केतु सहित सभी सातो ग्रह ​स्थित ​ हो जाते है. ​अधिक ​ मानसिक ​परेशानियां ​ खड़ी होने से जातक तिलमिला उठता है. लोग एसे जातक ​को बार बार अपमानित करते है और नीचे गिराने के लिए प्रयासरत रहते है , किन्तु यह जातक घबराते नहीं है और परिस्थितियों का डटकर मुकाबला करते है ​. ये एक अच्छे ​राजनीतिज्ञ हो सकते है और अपने ​ व्यक्तित्व को ​निखारते ​ है परन्तु साथ साथ इनका कोई भी काम बिना कठिनाई के नही होता ​है ​. 

शंखनाद  कालसर्प  योग : सातो ग्रह लेकर जब राहू और केतु , भाग्य और पराक्रम भाव  मे बैठते है तब शंखनाद कालसर्प दोष का निर्माण होता है  . इनके  भाग्य और कर्म  पक्ष के उत्तम होते हुये भी कोई ना कोई कष्ट उठते ही रहते है. इसके गुप्त शत्रु  कम ना होकर बढ़ते ही जाते है. इनका नाम ओर व्यवसाय बढ़ जाने पर भी अपना स्वयं ही विनाश कर लेते है।  इनका स्नेहशील  व्यवहार देखकर इनसे मिलनेवाला ही लाभ उठाता  है. जीवन की कुछ  गलतिया इन्हे अंदर ही अंदर परेशान करती रहती है।  गुप्त शत्रु काफी परेशान करते है। धीरे धीरे इन्हे समस्त वातावरण शत्रुंजय लगने लगता है। 


तक्षक नामक कालसर्प योग जो कि  सप्तम भाव में राहू ओर लग्न में  केतु के बैठने से बनता है।  ऐसा जातक धन परिवार और स्वाभिमान के लिए हमेशा संघर्ष करता रहता है.  कभी कभी जीवन से ऊब कर घर - गृहस्थी  तक का त्याग कर बैठता है . जिस किसी पर भी ये विश्वास करते है धोखा ही खाते है चाहे वह स्वयं की पत्नी ही क्यों न हो।   , दिल की आग दिल मे रख कर जीना इनका सवभाव ही बन जाता है  . इनपर ईश्वर की कृपा ना होने के कारण सफलता पाकर भी ये ख़ुशी का अनुभव नहीं कर पाते है।  

कर्कोटक नमक कालसर्प योग;; अष्टम ओर द्वितीया राहू केतु रहकर अन्य भावो मे सभी ग्रह बेठे. जिसमे अष्टम ओर द्वितीया भाव भी अट e है. ये सभी ग्रहो को निगल रहते है, जेसे निगला जीवन चछ्तपटा है,वेसे ही जातक तड़फड़ाने जेसी इस्ती मे होकर कुछ कुछ केहभीनाहीपाता.करने वाली होती है. लेकिन ये जातक वचन के पक्के रेहकर भी सम्बंध अक्ककी नहीं रख पते. व्यर्थ जीवन बिताना इन्हे पसंद नहीं होता. काम करना ओर उसके लिये प्रयतानशील रेहना इनकी आदत ही होती है. ये धन की घोर छ्चीणताओ मे फंसे रेहते है. उदरशूल,जनांिंयो रोग ओर गले तक  का रोग होकर ओप्रेटिओं तक के लिये इन्हे विवश होना पद्य है. नशीली चीज़ो के प्रेयोग का शोक लग जाता है. बच्चो के प्रति इनका प्यार  उमढ पड़ता है.

पातक नामक कालसर्प योग : दसवे   भाव  में जब राहु और चतुर्थ भाव में केतु होने पर पातक कालसर्प दोष का निर्माण होता है।  ऐसे. जातक का वैवाहिक जीवन और अन्य  परिवार जनो के साथ संबंद्ध  असंतुष्ट रहता है. पैतृक संपत्ति  को कुटुम्बी जन नष्ट कर देते है. सन्तान अथवा करमफल मे से एक की ही प्राप्ति होती है. आजीविका और व्यवसाय की समस्या भी अक्सर परेशान करती है।   है. इस योग के जातक हमेशा समय से संघर्ष करते रहते है।   इन्हे ह्रदय , फेफड़ों और सां की समस्या अक्सर परेशान  करती है।  लोगो के अहसान और कर्ज के नीचे ये हमेशा दबे रहते है।  

विषाक्त नामक कालसर्प योग:योग तब बनता है जब एकादश राहू और पंचम केतु सभी ग्रहो को समेटे रहते है . जातक जीवन के तीन मूल सुख, विद्या , धन और पुत्र  मे से किसी एक को पाकर संतुष्ट रहने को विवश होता है. भावावेश ओर उदारवादिता के कारण ये कष्ट सहन करते है. ये अपने लिये नहीं बल्कि  दूसरो के लिये भी जीते है. इन्हे मधुमेह,अल्सर जैसे लम्बे चलने वाले  रोग ग्रसित रखते है. कुटुम्बी जन इन्हे जीने नहीं देते. बड़े भाई के कारण अथवा लाभ की चिंता इन्हे हमेशा कष्ट में रखती है।   उन्ही की सहायता के लिये ये चिंतित रेहते है. वैसे ये किसी पर भी मेहरबान हो सकते है.

शेषनाग नामक कालसर्प योग:बाहरवे राहू व छठे  केतु के अंतर्गत जब सभी ग्रह होते है तो ये योग बनता  है. जातक किसी भी परिस्थिति  के संसर्ग मे आकर उसमे ढलने को सहज  ही प्रस्तुत हो जाता है. शत्रु इनको तंत्र के माध्यम से कष्ट पहुचाने का प्रयास करते रहते है  लेकिन ये देवकृपा के कारण बच जाते है।  आसानी से इनका नहीं बिगड़ता है . देश विदेश से लाभ और साझेदारी  से हानि होती है. कार्य अनायास ओर अचानक बनते  है. सोच सांझ बेकार जाती है. इनकी वृति रचनात्मक होती है किन्तु  विपरीत वातावरण पाकर विकृत होने की संभावना प्रबल होती  है.





Friday, July 11, 2014

Deepawali in 2014

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At What Time What steps one should follow on DIWALI MUHURTA - http://www.bagulamukhijyotishtantra.com/blog/panchang/diwali-me-kis-samay-kya-kare/

Kartik Amavasya is in October . So date of celebration will be 23 / 10 / 2014.

Muhurta for Day -

 Saggitarius Ascendent - 10:39 am to 12:42 am.
 Capricorn Ascendent - 12:42 PM to 14:25 PM

Capricorn ascendent is a movable muhurta but this will be auspicious for pooja. Only Rahu kaal one should avoid for pooja. Rahu kal will be from 13:30 to 15 PM.

To gain monetary benefit PISEAS Ascendent will be godd for both - Pandits and Parishioner.
Beneficial Chaughadia from 15:53 to 17:18 is very good for diwali pooja. Worship in this time will yield very good results.

Muhurta for Night -

Amrit Chaughadia will start from 17:40 pm . Char ki Chaughadia will start from 19:14 pm and Laabh chaughadia means beneficial chaughadia will start from 24:06. This time will last till 01:42 am. Time from 24:06 to 01:42 am is the special time for worship of Goddess Laxmi.


Pooja by RAJGURU RAJKUMAR SHARMA

Preparation


First and foremost step is to clean the house. Through the puja we are inviting Goddess Lakshmi to our house and she likes everything to be neat and clean. Make a rangoli on front door at least. Offer few clay diyas in temple than lighten your house and start the puja.

Important Items Needed For Lakshmi Puja-

Kalash, Mango leaves, nariyal gari ( peeled coconut )
Idol or picture of Goddess Lakshmi and Ganesha, Shivling and Shri Yantra if you have
Milk, curd, honey, ghee, gangajal for Panchamrat
raw rice, dry fruits, ), incense sticks (agarbattis), vermilion (kumkum),
puja Sweets, Red cloth, Red and other color flowers, Seeds of kamalgatta, Hawan samagri ( fire sacrifice), Samidha for Navgrah, Kalawa ( a skein of thread ), supari ( Betel nut ), Coconut, Paan ke patte, Rangoli

Lakshmi Puja Process

• First decide on a place to perform the puja. It should be in East or North
• Spread a clean red cloth on a chouki ( a small stool for offering ) and create a bed of rice on lt and rt side.
• A Kalash (pot), is placed after tying three rounds of kalawa on the bed of rice.
• Fill the Kalash with water.
• Put a betel nut, flower, a clean coin, and some rice in the Kalash.
• Now arrange mango leaves around the opening of the Kalash in 7 or 9 number.
• Place a coconut after tying three rounds of kalawa on the Kalash.
• In the front of your right hand, draw a lotus with turmeric powder and flour and place the idol or small photograph of Goddess Lakshmi, Ganesha , Shri Yantra on bed bed of rice. Shiv ling you can keep on side also’
• Take some water and sprinkle on all puja items to purify them.
• Do puja with haldi, kumkum and flowers on the Kalash.
• Light a four faced lamp ( dipak ) . It should be for the whole night. The diyas serve a dual purpose. Their primary purpose is to drive away all the shadows of evil spirits present in the area. At the same time awakening of the light of good within each individual.
• The incense sticks are burnt while the clay lamps are filled with ghee and their wicks are lit
• Now remember the following deities in given order and offer each one the following set of offering- flower, 1 paan leave, loung, supari and some sweet .Guru is remembered before every pooja first. Than start with Ganesh ji , Navgarah ( Surya, Chandra, Mangal, Budh, Guru, Shukra, Shani, Rahu, Ketu), Kuber devta, Sthan devta and Vaastu devta.
• No puja is performed without paying customary tributes to Lord Ganesha. Lord Kubera, represents wealth, and he is the treasurer of Gods. In homes, usually the locker or safe in which gold and cash is kept symbolically represents the seat of Kubera.
• A panchamitra is made using five ingredients including milk, curd, honey, gangajal, and clarified butter (ghee). Offer this panchamrit to Lord Shiva with Mahamritunjay mantra-

“ Om Tryambakam yajamahe
Sugandhim pushti-vardhanam
Urvarukamiva bandhanan
Mrityor mukshiya mamritat"

• Now sprinkle the flowers and rice on the idol of Goddess Lakshmi.
• Take out the idol of Goddess Lakshmi and place it on a Thaali. Clean the idol with panchamrit. Then clean the idol again with water.
• Place the idol back. Now offer fruits, sweets, betel nuts and betel leaves.
• Next make offerings of Batasha and puffed rice ( lahi).
• Chant “ Om Mahalaxmaye Namah” for some time.
• Now do hawan. Offer hawan samagri to each diety you welcomed in above mention order with the hawan samagri. When you start offering for Goddess Laxmi, the head of the family will do with the kamalgatta and ghee and other family members with the hawan chanting “om mahalaxmaye namah” mantra for 108 times.
• When finished all family members should stand up and offer nariyal gari for purnahuti.
• .Now you are ready for the Aarti. Light the Aarti diya. Light camphor. Sing the aarti to the tune of 'Om Jai Jagdeesh hare' along with the accompaniment of the jingle of the bell. (You will find the words of the Aarti at the end of this note)

Here are the Diwali aartis, to be sung at the time of Diwali puja, in order to please the gods and ask for their blessings.

Shri Ganesha Aarti

Jai Ganesh Jai Ganesh, Jai Ganesh deva
Mata jaki Parvati, Pita Mahadeva.
Ek dant dayavant, char bhuja dhari
Mathe sindur sohai, muse ki savari, Jai
Ganesh...
Andhan ko ankh det, kodhin ko kaya
Banjhan ko putra det, nirdhan ko maya, Jai
Ganesh....
Pan chadhe, phul chadhe, aur chadhe meva
Ladduan ka bhog lage, saht kare seva, ,Jai
Ganesh....
Jai Ganesh, Jai Ganesh, Jai Ganesh deva,
Mata jaki Parvata, Pita Mahadeva.


THE MAHALAXMI AARTI 

Om Jai Laxmi Mata, Maiya JaiLaxmi Mata,
Tumko nis din sevat, Hari, Vishnu Data
Om Jai Laxmi Mata
Uma Rama Brahmaani, Tum ho Jag Mata,
Maiya, Tum ho Jag Mata,
Surya ChanraMa dhyaavat, Naarad Rishi gaata.
Om Jai Laxmi Mata.
Durga Roop Niranjani, Sukh Sampati Data,
Maiya Sukh Sampati Data
Jo koyee tumko dhyaataa, Ridhee Sidhee dhan paataa
Om Jai Laxmi Mata.
Jis ghar mein tu rehtee, sab sukh guna aataa,
Maiya sab sukh guna aataa,
Taap paap mit jaataa, Man naheen ghabraataa.
Om Jai Laxmi Mata
Dhoop Deep phal meva, Ma sweekaar karo,
Maiya Ma sweekaar karo,
Gyaan prakaash karo Ma, Moha agyaan haro.
Om Jai Laxmi Mata.
Maha Laxmiji ki Aarti, nis din jo gaavey
Maiya nis din jo gaavey
Dukh jaavey, sukh aavey, Ati aananda paavey.
Om Jai Laxmi Mata.
Do the above with faith and devotion and don't worry too much if you do not do it very correctly. Even after finishing your puja do maximum chanting of mahalaxmi mantra.

For more information submit your details here- http://www.bagulamukhijyotishtantra.com/

For Hindi Version read here http://rare-facts-in-spirituality.blogspot.in/2014/06/diwali-poojan-muhurta-2014.html

Monday, July 7, 2014

Rashifal for 2014

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जुलाई -

मेष - कुछ व्यक्तियों को विदेश सम्बन्धी कार्यों में प्रगति  होगी और कुछ लोगो को व्यवसाय में उन्नति के अवसर मिलेंगे. लाभ  खर्च भी बढ़ेंगे।  मन में घरेलु समस्याओं के कारन अशांति रहेगी।  किसी ख़ुशी के समाचार अथवा  बिगड़े हुए काम के बनने की सम्भावना माह के अंत में है। 

वृष -  माह के आरंभिक दिनों में मान सम्मान में  लाभ के अवसर बनेंगे।  विदेश यात्रा  के  योग बनने की सम्भावनाये भी  है । मानसिक तनाव, स्वास्थ्य ढीला और आँखों में कष्ट होने व खर्च होने के योग है। 

मिथुन - व्यवसाय में धन लाभ के साथ साथ खर्च अधिक रहेगा।  दूर की यात्राओं  के योग है।  १९ तारीख के बाद से दौड़ धुप और खर्च अधिक रहेगा।  आराम कम और संघर्ष अधिक रहेगा।  कुछ समस्याएं जमीन जायदाद और व्यवसाय से सम्बंधित इस समय उत्पन्न हो सकती है। 

कर्क - यह समय मिश्रित प्रभाव वाला है।  इस समय आय कम और खर्च अधिक रहेगा।  भाग दौड़ और खर्चे अधिक रहेंगे।  १६ तारीख से सूर्य के संचार के कारण स्वास्थ्य सम्बन्धी परेशानियां जैसे पेट विकार की समस्या परेशान करती है।  क्रोध अधिक रहेगा , निकट बंधुओं से विरोध एवं खर्च बढ़ेंगे। 

सिंह - व्यापार - व्यवसाय की  स्थिति में सुधार आने की सम्भावनाये है। रिश्तेदारों में मेलजोल बढ़ेगा।  सुख साधनों पर 
खर्च होगा।  माह के अंत में कामों में विघ्नों के आने की सम्भावनाये है।  वृथा खर्चों से मानसिक तनाव व हानि होगी।  शारीरिक कष्ट एवं चोटादि की संभावना भी इस माह में है. 

कन्या - कार्य व्यवसाय सम्बन्धी नवीन योजना बनेगी।  कुछ बिगड़े काम बनेंगे।  उच्च प्रतिष्ठित लोगों के साथ संपर्क बनेंगे।  घर परिवार में मंगल कार्य का आयोजन होने के संकेत है।  २९ तारीख से बुध लाभ स्थान एवं कर्क राशि में होगा।  मान सम्मान में वृद्धि एवं धन लाभ के अवसर आएंगे परन्तु खर्च भी बढ़ेंगे। 

तुला - मासारम्भ में शनि वक्री होने से सोची योजनाओं में सफलता के लिए परिश्रम करना पड़ता है।   व्यवसाय में उन्नति के अवसर प्राप्त होंगे और जॉब में पदोन्नति की सम्भावना है. मासांत में अड़चनों के बाद सफलता मिलेगी. पारिवारिक चिंताएं और खर्चे परेशान कर सकते है। 

वृश्चिक - मान प्रतिष्ठा में वृद्धि  , धन लाभ और उन्नति के अवसर प्राप्त होंगे।  माह के अंत में धन व् परिवार सम्बन्धी उलझने होंगी।  कार्य के क्षेत्र में चिंता बनी रहेगी।  श्री हनुमान जी का पाठ करना शुभ होगा। 

धनु - व्यवसाय में धन लाभ एवं उन्नति के अवसर मिलेंगे किन्तु मान प्रतिष्ठा बनाये रखने के लिए संघर्ष अधिक करना पड़ेगा।  १३ जुलाई के बाद से क्रोध की मात्र स्वभाव  रहेगी. माह के अंत में खर्चे  होगे ।

मकर - क्रोध , मानसिक तनाव और पारिवारिक उलझने इस समय अधिक रहेंगी।  संघर्ष और परिश्रम के उपरान्त गुजारे लायक  प्राप्ति होगी।  स्वास्थ्य के प्रति सावधान रहने की आवश्यकता है।  धन प्राप्ति संघर्ष के उपरान्त होने की संभावना है।  माह के अंत में कुछ उलझे हुए कार्यों  के सुलझने की संभावना है।  कोई शुभ समाचार भी मिल सकता है।  गुरु गायत्री का पाठ करना शुभ होगा।  

कुम्भ - माह के आरम्भ में कार्य क्षेत्र में स्थित अनुकूल रहेगी।  शुभ कार्यों में व्यय अधिक होगा।  परिवार में सुख साधनो में  वृद्धि होगी। नवीन कार्य की योजना बनेगी।  किसी प्रिय और श्रेष्ठ जनों  के साथ संपर्क स्थापित होगा।   मासांत में छोटे छोटे कार्य निपटाने से लाभ होगा।  बगवान शिव की पूजा से लाभ होगा।  

मीन - कार्य व्यवसाय में उन्नति एवं लाभ के अवसर मिलेंगे।  अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए विशेष परिश्रम और संघर्ष का सामना करना पडेगा।  २० तारीख के पश्चात अत्याधिक भागदौड़ के बाद निर्वाह योग्य आय के साधन बनेंगे।  माह के अंत में मानसिक तनाव एवं खर्चो में वृद्धि होगी।  श्रावण महातम्य का पाठ एवं शिव पूजन करना शुभ होगा।